प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चीनी समर्थित LOAN APPS के खिलाफ जांच में एनबीएफसी Kudos Finance के सीईओ Pavitra Pradip Walvekar को गिरफ्तार किया

Enforcement Directorate (ED) ने शनिवार को non-banking financial company (NBFC) Kudos Finance and Investment Private Limited के प्रोमोटर,डायरेक्टर और CEO Pavitra Pradip Walvekar को हिरासत में लिया है और उसके बाद Pavitra Pradip Walvekar को 15 की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है

Enforcement Directorate (ED)  एजेंसी ने एक बयान में कहा कि Pavitra Pradip Walvekar  को हैदराबाद में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए)  PMLA की विशेष अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
ED के द्वारा यह कार्यवाही instant personal loans APPS के केस में ली गयी है जिसमे पहले कई लोगो ने आत्महत्या कर ली थी . बाद में जब जांच होना शुरू हुआ तो यह मामला तो पूरी तरह से हवाला के व्यापार का निकला .एक बयान में कहा गया है कि चाइना कंपनियों के फण्ड से चलने वाली फिनटेक कंपनियों के साथ मिलकर ये NBFC कंपनियां सात दिन ,चोदह दिन का लोन देकर लोगो की रेंगिंग करते थे ,उन्हें प्रताड़ित करते थे.

एजेंसी के द्वारा कहा गया है कि “कुडोस फाइनेंस कंपनी,सर्विसेज प्रोवाइडर कंपनियों के साथ एक अग्रीमेंट करती थी जिसमे ग्राहक को लोन लेने और चुकाने के प्रोत्साहित करना,उनकी eligibility को जांचना ,ग्राहकों से उनके डाक्यूमेंट्स इकठ्ठा करना ,उन्हें जांचना,लोन की वसूली करना और जितने भी कार्य लोन देने से लेकर वसूलने तक के होते है उन सभी का अग्रीमेंट होता था .

एजेंसी के द्वारा बताया गया कि कुडोस कंपनी इन फिनटेक कंपनी से सर्विस अग्रीमेंट करती थी लेकिन वास्तविकता में  उनको अपने NBFC लाइसेंस का गलत इस्तेमाल करने की अनुमति देती थी .

एजेंसी के द्वारा बताया गया कि कुडोस कोमप्न्य के द्वारा बहुत ही कम पैसा लगाया जाता था लेकिन अपनी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी से security deposits के तोर बहुत ही बड़ी राशि ली जाती थी और उसके बाद पेमेंट गेटवे में separate merchant ID (MID) बनवा दी जाती थी जो कि हर एक लोन apps के लिए अलग होती थी और इन्ही आई. डी. के पेमेंट गेट वे अकाउंट में security deposits के तोर पर ली गयी राशि को जमा करवा दिया जाता था .कुडोस कंपनी का खुद का कभी कोई लोन अप्प नही रहा है .

एजेंसी के द्वारा यह भी बताया गया कि कुडोस कंपनी खुद कभी लेंडिंग के बिज़नस में नही रही है .एक छोटा सा स्टाफ रखकर अंधे तरीके से फिनटेक और nbfc के बीच के MoUs को ऑपरेट करने दिया जाता था .और इस तरह से फिनटेक कंपनियां अपने फंड्स पर लोन बिज़नस करती थी . साथ ही ED के द्वारा आरोप लगाया गया कि बिना कुछ किये कुडोस कंपनी इन फिनटेक कंपनियों से मोटी रकम लेती थी .

फिलहाल किसी भी सरकारी अधिकारी या एजेंसी के माध्यम से यह नही बताया गया कि कुल कितनी राशि का हवाला रैकेट था क्युकी जांच अभी तक भी जारी है . कीई नामी कंपनी अभी तक राडार में पूरी तरह से नही आ पाई है . या तो इन कंपनियों के अधिकारी भाग गए या इन कंपनियों पर जांच चल रही है .

हमारे सूत्रों के अनुमान के मुताबिक यह हवाला रेकेट सवा लाख करोड़ के करीब का है .जहा इन कंपनियों में एक जगह बैंक खातों में ही करोडो रूपये सीज करे गए और इस तरह के कई बैंक खाते है जिन्हें सीज किया गया है .

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