CashBean: P C FINANCIAL SERVICES की लंका में लगी सेंध,सबसे बड़ी चाइना ओनरशिप की कंपनी पर ED की कार्यवाही में लगभग 107 करोड़ के खाते सीज

हमारे द्वारा हमेशा है गलत लोगो के खिलाफ आवाज़ उठाई गई है और इसी तरह हमारे द्वारा फिनटेक कम्पनीज के खिलाफ उनके उत्पीडन करने और मनी लोंड्रिंग जेसे कार्य को उजागर किया है । हमारे द्वारा हमेशा कहा गया था कि जो कार्यवाही CID या ED के द्वारा इन चाइना फंडिंग बड़ी कंपनियों पर नही की गई वो निराशाजनक था । कई FIR में बड़ी बड़ी कंपनियों के नाम लिखे गए है लेकिन इन बड़ी कंपनियों पर साइबर पुलिस ने कोई कार्यवाही नही की है । जिसमे एक FIR हैदराबाद में दर्ज करवाई गई थी जिसमे कई लोगो को अरेस्ट किया गया जबकि उसी FIR में CASHBEAN app का  भी नाम था लेकिन cashbean के किसी भी डायरेक्टर को अरेस्ट नही किया गया है हालाँकि ये क्यूँ नही किया गया इसका हमें कोई पता नही है ।

लेकिन आज हम बात करते है ED की जिसने CASHBEAN लोन एप्लीकेशन (PC Financial Services Private Limited)106.93 करोड़ रूपये के वर्चुअल,पेमेंट गेटवे ,और बैंक अकाउंट FEMA, 1999 के तहत सिज़ कर दिए है।

क्या है FEMA 1999 ?

आर्थिक सुधारों तथा उदारीकृत, परिदृश्‍य के प्रकाश में फेरा को एक नए अधिनियम द्वारा प्रतिस्‍थापित किया गया जिसका नाम है विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 । यह अधिनियम भारत में निवासी किसी व्‍यक्ति के स्‍वामित्‍वाधीन या नियंत्रित भारत के बाहर सभी शाखाओं, कार्यालयों तथा अभिकरणों पर प्रयोज्‍य है। फेमा का आविर्भाव एक निवेशक अनुकूल विधान के रूप में हुआ है ।

अब आगे क्या हो सकता है ?

इसके उल्‍लघंन में केवल मौद्रिक शास्तियों तथा अर्थदंड का भुगतान ही शामिल है, तथापि, इसके तहत किसी व्‍यक्ति को सिविल कारावास का दंड तभी दिया जा सकता है यदि वह नोटिस की तिथि से 90 दिन के भीतर निर्धारित अर्थदंड अदा न करे किन्‍तु ऐसा भी ‘कारण बताओ नोटिस’ तथा वैयक्तिक सुनवाई की औपचारिकताओं के पश्‍चात ही किया जाता है। 

जिनके साथ उत्पीडन किया गया वो क्या करे ?

जिन लोगो के साथ इस कंपनी के द्वारा किसी तरह का उत्पीडन किया गया हो तो वो पुलिस में जाकर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है लेकिन वहां पर भी शिकायत दर्ज नही होती है तो कोर्ट का सहारा लेकर 156 के तहत कोर्ट से ही FIR फाइल करवाई जा सकती है .जब सरकार और सरकारी एजेंसियों ने कार्यवाही करना शुरू किया है तो हमारा यह कहना है कि जितने लोगो के साथ उत्पीडन हुआ है जाली कागज़ या नोटिस भेजे गये है,मोबाइल डाटा का गलत उपयोग हुआ हो, वो सभी अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन जाये और शिकायत दर्ज करवाए.

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