BJP नेता के बेटे के सुसाइड की दर्दनाक कहानी: 6 लाख रूपये का 30000 रूपये रोजाना ब्याज,6 महीने में ही 6 लाख के 60 लाख हुए , 18 लाख चूका दिए

श्रीगंगानगर के पदमपुर में मंगलवार को भाजपा नेता के बेटे ने फाइनेंसर से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी। इस इलाके में सूदखोरों का ऐसा दबदबा है कि जो इनके चंगुल में फंस गया वह फंसता ही चला जाता है। युवक के आत्महत्या करने के बाद दैनिक भास्कर ने पीड़ित परिवार के लोगों और रिश्तेदारों से पूरा सच जानने की कोशिश की। सामने आया कि दीपक ने छह लाख रुपए उधार लिए थे, लेकिन बढ़ते-बढ़ते यह राशि 60 लाख तक पहुंच गई। महज 7 माह में छह लाख का मूलधन 60 लाख की उधारी में बदल गया। ऐसे में खुदकुशी के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। भास्कर टीम ने ब्याज का फॉर्मूला जाना तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

यह था ब्याज का ‘टॉर्चर फॉर्मूला’ दीपक ने करीब 7 माह पहले जनवरी के आखिरी दिनों में फाइनेंसर इंद्र आहूजा से 6 लाख रुपए उधार लिए थे। ब्याज की दर 5 प्रतिशत प्रतिदिन थी। अगर किसी ने एक हजार रुपए लिए तो उसे 50 रुपए रोज ब्याज चुकाना होगा। दीपक की मूल उधारी 6 लाख रुपए थी। यानी उसे हर दिन केवल ब्याज के ही 30 हजार रुपए देने होते थे। एक महीने में ब्याज 9 लाख रुपए बन जाता था। इस तरह से ब्याज बढ़ता गया। महज 7 माह में ही यह राशि 6 लाख रुपए से बढ़कर 60 लाख रुपए से ज्यादा हो गई। यह राशि इतनी बड़ी थी कि सामान्य कारोबार करने वाले दीपक और उसके परिवार की समझ से परे थी।

पत्नी के खाली चेक पर हस्ताक्षर करवा रखे थे
दीपक को इंद्र आहूजा ने फाइनेंस किया था। आहूजा की इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान और कुछ रेस्टोरेंट हैं। वह इतना शातिर था दीपक ने जब गिफ्ट शॉप की दुकान खोली तो उसने दबाव बनाने के लिए पत्नी और परिवार के लोगों से भी खाली चेक पर हस्ताक्षर करवा लिए थे। कुछ स्टांप पर साइन करवाए थे।

रास्ते में रोकता, पति-पत्नी को धमकाता
दीपक के रुपए नहीं चुकाने पर फाइनेंसर उसे रास्ता रोककर परेशान करता। कभी फोन पर धमकाता तो कभी गालियां देता। कई बार फाइनेंसर घर से बाहर निकले पति-पत्नी को एक साथ रोककर पैसे चुकाने के लिए दबाव बनाता। रुपए नहीं चुकाने पर पत्नी के साइन किए हुए चेक बैंक में लगाकर कर पत्नी को जेल भिजवाने की भी धमकी देता। हर दिन की सुबह दीपक के कर्ज को बढ़ा रही थी। किसी तरह उसने करीब 18 लाख रुपए चुकाए भी थे और परिवार के लोग 20 लाख रुपए और चुकाने को तैयार थे, लेकिन फाइनेंसर इंद्र आहूजा उर्फ बट्‌ठल मानने को ही तैयार नहीं था। परेशानी बढ़ती गई तो दीपक के पास एक ही रास्ता बचा और वह था मौत को गले लगा लेना, उसने वही किया। इसकी मौत के बाद कस्बे में फाइनेंसर के कई और पीड़ित सामने आ गए हैं।

कई फंसे हैं मकड़जाल में
फाइनेंसर के इस मकड़जाल में कस्बे के कई लोग फंसे हुए हैं। मंगलवार को भाजपा नेता के बेटे दीपक के आत्महत्या कर लेने के बाद एक दो लोग सामने भी आए, जिन्होंने फाइनेंसर से पीड़ित होने की बात मानी। इन लोगों से भी फाइनेंसर ने बड़ी राशि ब्याज के रूप में वसूली थी। अब ये लोग अपनी पीड़ा भी बयान कर रहे हैं। हालांकि पुलिस में ऐसा कोई मुकदमा सामने नहीं आया, लेकिन दबी जुबान लोग सूदखोरी की बात मान रहे हैं। पुलिस के अनुसार कुछ लोगों ने शिकायत की है, लेकिन जब तक लिखित में शिकायत नहीं होगी, नाम सामने नहीं आ पाएंगे।

तीन साल पहले शुरू किया था गिफ्ट स्टोर
भाजपा नेता के बेटे दीपक ने तीन साल पहले कस्बे के अनारकली बाजार में गिफ्ट स्टोर शुरू किया था। बिजनेस शुरू करने बाद करीब ढाई साल पहले ही उसकी शादी हुई थी। ऐसे में अभी तक यह तो स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर रुपए की जरूरत उसे क्यों पड़ी? कस्बे के लोगों का अनुमान है कि संभवत: उसे बिजनेस में पैसा इन्वेस्ट करना था। कोरोना संकट के दौर में दीपक को बिजनेस में काफी नुकसान हुआ था। काम काज ठप होने के कारण भी दीपक परेशान था।

सक्षम परिवार से था दीपक
दीपक के पिता भाजपा के मंडल अध्यक्ष रह चुके हैं। उनकी शहर में आढ़त की दुकान भी है। दीपक का एक बड़ा भाई भी बिजनेस ही करता है। हालांकि दीपक एक सक्षम परिवार से था, लेकिन ब्याज पर पैसा लेने की बात से सब अनजान थे। जैसे ही परिवार को यह बात पता चली तो उन्होंने फाइनेंसर के साथ बैठकर 20 लाख रुपए में मामला निपटाने को कहा था।

पुलिस ठिकानों पर दे रही दबिश
दीपक के सुसाइड करने के बाद से ही आरोपी फाइनेंसर और उसका पूरा परिवार शहर से गायब है। पुलिस जब उनके जानने वालों के यहां दबिश देने पहुंची तो वहां ताले लटके मिले। फिलहाल आरोपी का कोई सुराग नहीं लगा है।

गौरतलब है कि मंगलवार के दिन फाइनेंसर से परेशान होकर पदमपुर में भाजपा नेता के बेटे ने अपनी दुकान में फांसी लगाकर जान दे दी थी। मृतक के पास किसी तरह का कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन खुदकुशी के इस हाईप्रोफाइल मामले ने सूदखोरी की टॉर्चर कहानी को जनता के बीच लाकर रख दिया है।

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