राजस्थान की बेची गईं बेटियों का दर्द:काम के नाम पर ले जाते हैं, रेप करते हैं; कई लड़कियां लापता

राजस्थान से सटे गुजरात-मध्यप्रदेश बॉर्डर के नजदीकी गांवों में बेटियों को बेचने का घिनौना काम हो रहा है। कामकाज का झांसा देकर दलाल इन्हें गुजरात और मध्यप्रदेश ले जाते हैं, वहां रेप करते हैं और आगे बेच देते हैं। 

जिन लड़कियों को शिकार बनाया जाता है, वह गरीब तबके से होती हैं। मानव तस्करी का गिरोह चलाने वाले लोग दलालों की मदद से इन लड़कियों को दूसरे राज्य में काम दिलाने का लालच देते हैं। किसी को गुजरात तो किसी को मध्यप्रदेश भेज दिया जाता है। यहां ये एक से दूसरे ठेकेदारों के हाथों बिकती जाती हैं। काम दिलाने के नाम पर केवल मारपीट और इनसे रेप हो रहा है।

रतनमाल की श्यामा (बदला हुआ नाम) की उम्र तो केवल 13 साल है। दूसरों को देख वह भी कुशलगढ़ मजदूरी के लिए गई थी। वहां से एक ठेकेदार उसे जीप में डालकर कोटलिया ले गया। वहां से डूंगरा और अहमदाबाद, फिर यहां एक नए ठेकेदार के हाथों में सौंप दिया, जो बड़ौदा ले गया। वहां से तीसरे ठेकेदार ने उसे मध्यप्रदेश भिजवा दिया। इस बीच उससे मजदूरी कराई गई। उसके साथ जमकर मारपीट भी हुई। कई बार उसके साथ रेप भी हुआ। डर के चलते 5 महीने तक सब सहन करती रही। इधर, परिवार तलाश करते हुए पुलिस के पास पहुंचे। पुलिस ने सख्ती दिखाई और तीनों बदमाशों को धर लिया।

गुजरात से लेकर एमपी के ठेकेदारों तक बेचा जाता है

यहां रहने वाले परिवारों ने जो कहानियां बताई, वह दर्दनाक है। कुछ ऐसे परिवार थे जिनकी बेटियां ठेकेदारों के चंगुल से पीछा छुड़ाकर घर पहुंचीं और कई ऐसी भी हैं, जो आज तक घर नहीं आईं। जो घर तक पहुंचीं, उन्होंने टीम को रौंगटे खड़े करने वाली कहानियां बताईं। उन्होंने बताया कि गांव से मजदूरी के नाम पर निकले थे। एक ठेकेदार से दूसरे ठेकेदार और ऐसे करते हुए तीन से चार ठेकेदारों को बेचते गए। राजस्थान से गुजरात और वहां से एमपी के ठेकेदारों तक उन्हें बेचा गया। मजदूरी के नाम दिन-रात काम करवाते। मारपीट करते और फिर रेप करते, एक बार नहीं कई बार।

37 लड़कियों के लापता होने की पुष्टि मानव तस्करी विरोधी यूनिट ने भी की

इन एरिया में 109 से अधिक नाबालिग लड़कियां गायब हैं। इसमें 37 गायब लड़कियों की पुष्टि तो खुद मानव तस्करी विरोधी यूनिट कर चुका है। 31 जनवरी 2021 को गुमशुदा लड़कियों की लिस्ट भी जारी की गई थी।

इतने दर्द के बाद लगती हैं, बोलियां

इस एरिया में मजदूरी के नाम से जिन लड़कियों को बेचा जाता है और जब वे वापस आती है तो इनका दर्द यहीं खत्म नहीं होता। यहां इनकी बोली लगती है। यदि ठेकेदार के बारे में पता चल जाता है तो इसके बाद परिवार की बेटी के साथ जो गलत हुआ उसका सौदा रुपए में तय किया जाता है। परिवार की मांग के अनुसार रुपए मांगे जाते हैं। दोनों पक्षों में समझाइश होती है और इसके बाद एक कीमत तय कर समझौता कर लिया जाता है।

केस नंबर 1- पिता की मौत, घर चलाने के लिए मजदूरी करने गई, वहां बंधक बनाया
रतनमाल (कुशलगढ़) की 15 साल की पिंकी (बदला हुआ नाम) के पिता नहीं हैं। एक बड़ा भाई और मां है। घर की जिम्मेदारी संभालने के लिए 5 महीने पहले वह गुजरात गई थी। 5 महीने बाद अभी 27 जून को ही घर लौटी। आते ही मां से लिपटकर रोई। बोली मुझे माफ करना। मेरे पास मजदूरी का रुपया नहीं है। उसने बताया कि उसे बंधक बनाकर रखा जाता था और मजदूरी कराते थे। शारीरिक शोषण भी किया, लेकिन काम के नाम पर एक रुपया भी नहीं मिला। बताया कि वह मजदूरी के लिए मोर गांव गई थी। इसके बाद गांव के लोगों के साथ सूरत गई। वहां से कुछ लोगों ने उसे बंधक बना लिया और उनके साथ मोलवी, कच्छ-भुज और अहमदाबाद ले गए। वहां से छोटा डूंगरा पहुंची, जहां से कुशलगढ़ पुलिस ने उसे घर पहुंचाया। पिंकी की मां ने बताया कि बेटी की तलाश में उसने बहुत कुछ खोया है। कई बार थाने और छोटा-डूंगरा भी गई। गलत हाथों में फंसी बेटी को घर भेजने की बजाए सब लोग मिलकर बेटी की कीमत लगा रहे थे। एक अनजान लड़के को बेटी सौंपने के लिए कह रहे थे। वह लड़का उनकी गोत्र का था, जहां बेटी व्यवहार नहीं कर सकते थे। मैंने मना किया और अड़िग रही। पुलिस ने भी उससे समझौता कर लड़की की कीमत लेने का दबाव बनाया, लेकिन अजीविका ब्यूरो की अनीता मछार ने उसका साथ दिया।

केस नंबर 2- दो बहनें साथ मजदूरी के लिए गई और रेप हुआ
श्यामा की बड़ी बहन अनुराधा (बदला हुआ नाम) के साथ भी ऐसा ही धोखा हुआ। छोटी बहन के साथ इन सभी जगहों पर मजदूरी के नाम पर रेप हुआ। श्यामा की तरह उसे बड़ोदरा और मध्यप्रदेश नहीं भेजा गया बल्कि वह अहमदाबाद में ही थी। मध्यप्रदेश से बरामद हुई श्यामा के बयान से मिले सुराग के बाद पुलिस ने अनुराधा को अहमदाबाद से ढूंढ निकाला, लेकिन उसके साथ जो कुछ भी हुआ वह उन पलों को अब तक नहीं भूला पाई है।

केस नंबर 3- मां-बाप की कमाई से घर चलाना मुश्किल हुआ तो गुजरात गई
कुशलगढ़ मुख्यालय से करीब 17 किलोमीटर दूर शोभावटी (थाना पाटन) गांव है। माता-पिता दोनों मजदूरी करते हैं, लेकिन इसके बाद भी घर चलाना मुश्किल हुआ तो वह उसके घर से मामा के यहां गई थी। वहीं उसे गुजरात में मजदूरी का लालच देकर कुछ लोग अगस्त 2019 में गुजरात ले गए। गुजरात के बड़ौदा जाने तक की खबर तो परिवार को है, लेकिन इसके आगे वह कहां गई और अभी कहां है आज दिन तक उसके बारे में पता नहीं कर पाए। पुलिस ने गुमशुदा सूची में लड़की को शामिल करते हुए सितम्बर 2020 में मामला भी दर्ज कराया, लेकिन आज तक उन्हें अपनी बेटी का इंतजार है।

गांव केवल खेती पर निर्भर, यहां 200 गुजरात और एमपी में 400 रुपए मजदूरी का लालच

बांसवाड़ा के कई इलाके ऐसे हैं, जहां पर काम-काज का संकट रहता है। शिक्षा का स्तर बेहद खराब है, ऐसे में महिलाएं भी दूरदराज के इलाकों में काम के लिए जाती है, लेकिन वे गलत हाथों में फंस जाती है। कुशलगढ़ नोन कमांड एरिया है। केवल बरसात के दिनों में खेती होती है। इससे परिवार की सालाना अनाज की व्यवस्था हो जाती है। यहां काम के नाम केवल 200 रुपए की मजदूरी मिलती है जबकि गुजरात में 400 रुपए।

आजीविका ब्यूरो ने बेटी को मां से मिलाया
गुजरात से लौटी किशोरी को लेकर उसकी मां ने खूब संघर्ष किया। उसके अनपढ़ होने का फायदा पुलिस जवान उठा रहे थे। तभी उसका संपर्क आजीविका ब्यूरो की अनीता मछार से हुआ। अनीता पहले तो पीड़ित मां को लेकर चौकी पहुंची। वहां के हैड कांस्टेबल ने उसे थाने भेज दिया। थाने वालों ने फिर चौकी भेजा। इस दौरान पीड़ित मां के साथ अनीता को देखकर संबंधित चौकी प्रभारी मौके से छिपने की कोशिश करने लगा। यहां अनीता ने खुद को समाज सेविका बताते हुए पुलिस कार्रवाई का विरोध जताया। मामले में उच्चाधिकारियों से बात करने की धमकी दी। इस मामले में अनीता ब्यूरो के कमलेश शर्मा ने कानूनी सलाह भी लेती रही। थक हार कर पुलिस को किशोरी को परिजनों को सुपुर्द करना पड़ा।

मिलाप ऑपरेशन चलाया था
बांसवाड़ा एएसपी कैलाश सांधू ने बताया कि घर परिवार से दूर हुई बेटियों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए फरवरी में ऑपरेशन मिलाप चलाया था। कुछ लड़कियों को घर तक पहुंचाया भी था। इसके बाद कोरोना आ गया तो पुलिस उसमें व्यस्त हो गई। इस बीच नकबजनी और अपराध जैसे मामले बढ़ गए। जिला पुलिस द्वारा आगामी दिनों में ऐसे गांवों में अभियान चलाया जाएगा। ताकि मजदूरी से जुड़ी हुई लड़कियों में जागरूकता पैदा हो। रही बात पुलिस की ओर से ऐसी बेटियों के मिलने के बाद परिजनों को सौंपने में देरी की या गलत तरह से मध्यस्थता कराने की तो इसकी जानकारी मिलते ही कार्रवाई की जाएगी। वहीं कुशलगढ़ डिप्टी संदीप सिंह ने बताया कि कम उम्र की बेटियों को गलत हाथों में सौंपने वाले कुछ मामलों में पुलिस ने कार्रवाई की है। बेटियों की सुरक्षा को लेकर सीएलजी की बैठक में लोगों को जागरूक करते हैं। बेटियों की गुमशुदगी वाले मामले ऐसे हैं, जिनमें लड़के शादी कर लेते हैं। पुलिस की उपस्थिति में लड़कियों की बोली लगाने वाला कोई मामला सामने नहीं आया है।

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