असम विधानसभा में सीएम हिमंता बिस्व सरमा ने मवेशी संरक्षण विधेयक-2021 पेश किया,कांग्रेस और AIUDF ने जताया विरोध

यूपी में अभी जनसंख्या नियंत्रण विधेयक पर विवाद थमा ही नहीं था कि असम में एक और विधेयक ने विवाद बढ़ा दिया। असम विधानसभा में सीएम हिमंता बिस्व सरमा ने मवेशी संरक्षण विधेयक-2021 पेश किया है। इस विधेयक के तहत हिंदू, जैन और सिख बाहुल्य इलाकों में मवेशियों के वध और बिक्री पर रोक लगेगी। 

दरअसल मवेशी संरक्षण विधेयक-2021 के तहत बैल, गाय, बछिया, बछड़े, भैंस, भैंसा और कटड़ा को संरक्षण मिलेगा। नए विधेयक में सिर्फ मान्यता प्राप्त बूचड़खानों में वध करने की अनुमति का प्रस्ताव है। इसके अलावा मवेशी के स्थायी रूप से अपाहिज होने पर ही वध की अनुमति होगी। इसके लिए पशु चिकित्सा अधिकारी प्रमाण पत्र जारी करेगा

मवेशी संरक्षण विधेयक-2021 में कानून तोड़ने पर सजा का भी प्रस्ताव है। सरमा ने सदन में विधेयक पेश करने के बाद यह भी उल्लेखित किया कि ‘‘नये कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मवेशियों के वध की उन क्षेत्रों में अनुमति नहीं दी जाये जहां मुख्य रूप से हिंदू, जैन, सिख और बीफ नहीं खाने वाले समुदाय रहते हैं अथवा वे स्थान किसी मंदिर और अधिकारियों द्वारा निर्धारित किसी अन्य संस्था के पांच किलोमीटर के दायरे में आते हैं।’’ उन्होंने कहा कि कुछ धार्मिक अवसरों के लिए छूट दी जा सकती है।

कानून के उल्लंघन पर गैर जमानती धारा में केस दर्ज होगा। दोषी साबित होने पर कम से कम 3 साद की जेल होगी।  मवेशी संरक्षण विधेयक-2021 में अधिकत्तम सजा का प्रावधान 8 साल का है, इसके अलावा कम से कम 3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगेगा। अगर किसी को दूसरी बार इस अपराध में दोषी पाया गया तो उसे दोगुनी सजा मिलेगी।

असम विधानसभा में मवेशी संरक्षण विधेयक-2021 होने के बाद राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता रिपुन बोरा ने सीमित इलाकों में मवेशियों के वध पर सवाल उठाए हैं। वहीं AIUDF ने इस विधेयक को जीडीपी से जोड़ दिया है। नेताजी को डर है कि मवेशी संरक्षण कानून बनने के बाद सड़कों पर लाखों गाय आ जाएंगी

इसी साल सीएम पद की शपथ लेने के बाद सीएम हिमंता बिस्व सरमा लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। जनसंख्या नीति के बाद अब मवेशी संरक्षण बिल-2021 पेश कर हिमंता बिस्व सरमा  ने साबित किया है कि वो असम के विकास में वोटबैंक की राजनीति रोड़ा नहीं बनने देंगे.

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