समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) पर विचार करे केंद्र: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि देश में एक समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) कानून को लागू करने का ये सबसे सही है। कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि जब भी इस कानून की बात होती है तो कुछ लोगों का सेक्युलरिज्म खतरे में आ जाता है। 

केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ‘जब भी कॉमन सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) की बात होती है तो कुछ लोगों का सेक्युलरिज्म खतरे में आ जाता है। क्या हमारे संविधान निर्माता सेक्यूलर नहीं थे? संविधान के अनुच्छेद 44 में ये निर्देश दिया गया है कि राज्य इसके लिए हालात बनाए तो किसी को क्या आपत्ति हो सकती है?”

समान नागरिक संहिता पर विचार करे केंद्र: दिल्ली हाईकोर्ट

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अब समाज में धर्म, जाति और समुदाय की पारंपरिक रूढ़ियां टूट रही हैं। इसलिए समय आ गया है कि संविधान की धारा 44 के तहत समान नागरिक संहिता की तरफ कदम बढ़ाया जाए। इसके साथ कोर्ट ने ये कानून को लागू करने का सबसे सही समय है। दिल्ली हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को इस पर अब एक्शन लेना चाहिए। वहीं भाजपा ने दिल्ली सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।

देश की ज्यदातार आबादी और यहां तक कि कोर्ट भी यही चाहता है कि पूरे देश में एक कानून हो। लेकिन कॉमन सिविल कोड का जिक्र होते ही AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और PFI जैसे संगठन इस कानून का विरोध कर रहे हैं। 

‘एक विधान एक निशान हो तो फिर एक कानून क्यों नहीं?’: ए एन मित्तल

यूपी विधि आयोग के अध्यक्ष ए एन मित्तल ने कहा कि ‘अनेक बार कोर्ट ने कहा है कि देश को अब एक करना है, पीएम मोदी ने कई बार बोला है कि देश का एक विधान एक निशान हो तो फिर एक कानून क्यों नहीं! उसी के मद्देनजर 370 हटाया गया। जब गोवा में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है तो यहां क्यों नहीं वहां तो कोई समस्या नहीं। पिछली सरकारों ने मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति की।’

उन्होंने कहा कि ‘देश में समान नागरिक संहिता की जरूरत, ये लागू करने का सही समय भी है जब एक देश है, एक निशान है, तो एक विधान भी होना चाहिए। ये जातिवाद, धर्मवाद नहीं चलेगा। कांग्रेस की सरकारों ने हमेशा इस देश को बांटने की राजनीति की, जिससे महिलाओं और वंचितों पर बस अत्याचार हुए। तुष्टिकरण की सोच अब नहीं चलेगी।

क्या है कॉमन सिविल कोड?

बता दें कि अभी भी देश में अलग-अलग समुदाय और धर्म के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं। शादी ब्याह और तलाक से लेकर कई मामलों में उन्हीं के कानून के हिसाब से काम होता है. इसीलिए देश में एक संविधान एक विधान की बात लंबे समय से होती रही है. इम मुद्दे को लेकर काफी राजनीति भी हो चुकी है, लेकिन अब उम्मीद है कि अदालत की टिप्पणी के बाद केंद्र सरकार इसे लेकर कोई ठोस कदम उठाएगी. क्योंकि तीन तलाक और 370 जैसे मामलों पर फैसले लेकर मोदी सरकार एक उदाहरण सेट कर चुकी है। इस कानून के लागू होने से देश में हर व्यक्ति, हर समुदाय और हर जाति, धर्म के लिए एक कानून हो जाएगा. 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *