उत्तराखंड में सियासी संकट: धामी राज्य के नए CM ,4 महीने में राज्य के तीसरे मुख्यमंत्री होंगे

उत्तराखंड में तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद पुष्कर सिंह धामी राज्य के 11वें मुख्यमंत्री होंगे। उनके नाम पर शनिवार दोपहर को भाजपा विधायक दल की बैठक में मुहर लगा दी गई। ये बैठक 3 बजे से केंद्रीय पर्यवेक्षक नरेंद्र तोमर और प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम की मौजूदगी में हुई। इस बार भाजपा ने तमाम अनुभवी विधायकों को दरकिनार करते हुए युवा चेहरे को तवज्जो दी है। वे आज मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

केंद्रीय पर्यवेक्षक ने मीडिया से कहा कि बैठक में किसी दूसरे नाम की चर्चा नहीं हुई। सिर्फ पुष्कर सिंह धामी का नाम रखा गया और सबकी सहमति से इस पर मुहर लगा दी गई। नाम की घोषणा होने के बाद पुष्कर सिंह धामी ने कहा, ‘पार्टी ने एक सामान्य कार्यकर्ता, एक भूतपूर्व सैनिक के बेटे को राज्य की सेवा के लिए चुना है। हम लोगों की भलाई के लिए मिलकर काम करेंगे। हम कम समय में लोगों की सेवा करने की चुनौती स्वीकार करते हैं।’

विधायक दल की बैठक के तुरंत बाद पुष्कर सिंह धामी के साथ भाजपा के सभी नेता राजभवन पहुंचे। वहां राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। राज्यपाल से मुलाकात के बाद केंद्रीय पर्यवेक्षक नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि शनिवार को धामी विधायक दल के नेता चुने गए हैं। वे रविवार को शपथ लेंगे। हालांकि, फिलहाल यह साफ नहीं है कि रविवार को धामी अकेले शपथ लेंगे या उनके साथ कुछ मंत्रियों को भी शपथ दिलाई जाएगी।

गरीब परिवार में जन्मे, सरकारी स्कूल में पढ़े
पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड में खटीमा विधानसभा से विधायक हैं। पुष्कर सिंह धामी का जन्म 16 सितंबर 1975 को पिथौरागढ के टुण्डी गांव में हुआ था। उनके पिता सैनिक थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बीच सरकारी स्कूलों से प्राथमिक शिक्षा ली। तीन बहनों के बाद घर का अकेला बेटा होने की वजह से परिवार की जिम्मेदारियां उन पर हमेशा बनी रही।

ABVP और युवा मोर्चा में काम कर चुके हैं
धामी ने मानव संसाधन प्रबंधन और औद्योगिक संबंध में मास्टर्स किया है। वे 1990 से 1999 तक ABVP में अलग-अलग पदों पर काम कर चुके हैं। धामी 2002 से 2008 तक युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष भी रहे हैं। राज्य की भाजपा 2010 से 2012 तक शहरी विकास परिषद के उपाध्यक्ष रहे। वे 2012 में पहली बार विधायक चुने गए थे। उनकी अगुवाई में ही प्रदेश सरकार से स्थानीय युवाओं को 70% आरक्षण राज्य के उद्योगों में दिलाने में सफलता प्राप्त की।

RSS और कोश्यारी के करीबी हैं धामी
धामी को RSS का करीबी माना जाता है। वे महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के भी नजदीकी हैं। पुष्कर सिंह धामी के बारे में राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह एक ऐसा नाम है जो हमेशा विवादों से दूर रहा है। पुष्कर सिंह धामी भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे पर काफी जोरशोर से आवाज उठाते रहे हैं। युवाओं के बीच पुष्कर सिंह धामी की अच्छी पकड़ मानी जाती है।

जातीय संतुलन भी धामी के पक्ष में गया
राजपूत समुदाय से आने वाले धामी राज्य के तेज तर्रार नेताओं में शुमार हैं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पुष्कर सिंह धामी को सीएम बनाकर जातीय समीकरण भी साधने की कोशिश की गई है। तीरथ सिंह रावत के मुख्यमंत्री बनने के वक्त भी पुष्कर सिंह धामी का नाम रेस में शामिल रहा था।पुष्कर सिंह धामी राज्य के और मुख्यमंत्रियों के मुकाबले युवा हैं। धामी का युवा होना भी उनके मुख्यमंत्री चुने जाने के पक्ष में गया है।

साढ़े तीन महीने में ही क्यों गई तीरथ सिंह रावत की कुर्सी?
उत्तराखंड में महज साढ़े तीन महीने में ही तीसरे मुख्यमंत्री कामकाज संभाल रहे हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत के बाद CM बनाए गए तीरथ सिंह रावत अपने कामकाज से खास प्रभावित नहीं कर सके, उलटा अपने बयानों से विवादों में बने रहे। तीरथ सिंह रावत से जुड़ी ये कुछ बातें उनकी विदाई की वजह बनीं..

विवादित बयानों से चर्चा में रहे तीरथ
बतौर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का 114 दिन का कार्यकाल उनके विवादित बयानों के लिए ज्यादा जाना जाएगा। फटी जींस से लेकर 20-20 बच्चे वाले उनके बयानों को शायद ही कोई भूला हो। पद संभालते ही भावावेश में तीरथ कुछ का कुछ बोलते रहे।

कुंभ में कोरोना फैलने से छवि खराब हुई
कुंभ के दौरान उन्होंने संतों को खुश करने के लिए जिस तरह से कोरोना के नियमों में छूट देने का अधिकारियों को इशारा किया, उससे हिंदुओं का यह मेला कोरोना का हॉटस्पॉट बन गया। यही नहीं, कोर्ट की आंखों में धूल झोंकने के लिए BJP के करीबियों द्वारा सैंपलिंग और टेस्टिंग में जिस तरह से फर्जीवाड़ा किया गया, उससे तीरथ सरकार की छवि को बट्टा ही लगा।

चारधाम देवस्थानम बोर्ड खत्म नहीं कर सके
तीरथ सिंह ने त्रिवेंद्र सरकार के गैरसैंण मंडल बनाने के विवादित फैसले को पलटकर कुमायूं मंडल में उपजे विरोध को जरूर शांत किया, लेकिन चारधाम देवस्थानम बोर्ड को खत्म करने के बारे में घोषणा करने के बावजूद अमल नहीं कर सके। इससे ब्राह्मण समुदाय खुद को ठगा सा महसूस करने लगा। तीरथ सिंह ने त्रिवेंद्र सरकार की तरह सिर्फ खास समुदाय के लिए कुछ किया हो ऐसा तो नहीं हुआ, लेकिन चुनावी साल में वे कुछ भी ऐसा नहीं कर सके, जिससे BJP की संभावनाओं को बल मिलता हुआ दिखे।

उपचुनाव के लिए भी तीरथ कमजोर लग रहे थे
प्रदेश में विकास कार्यों की गति तो तीरथ शासन में पहले से भी धीमी हो गई। सीधे-साधे व्यक्तित्व वाले तीरथ कहीं से भी BJP के लिए इलेक्शन मैटेरियल साबित नहीं हो सके। अगर उन्हें उपचुनाव में भी जाना पड़ता तो कोई सीट ऐसी नहीं दिख रही थी, जिस पर तीरथ की जीत की गारंटी हो। यही बात तीरथ के सबसे अधिक खिलाफ गई।

उत्तराखंड का सियासी घटनाक्रम

  • रामनगर में आयोजित भाजपा के तीन दिनी चिंतन शिविर में भाग लेकर मंगलवार शाम को पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत देहरादून पहुंचे थे। बुधवार सुबह वह दिल्ली के लिए रवाना हो गए। देर रात ही उनकी राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात करने की सूचना मिली। इसके साथ ही कई तरह की चर्चाओं ने तेजी से जोर पकड़ा। ये बुलावा भी अचानक आया। बुधवार के उनके कई कार्यक्रम उत्तराखंड में लगे थे। उन्हें छोड़कर सीएम को दिल्ली दरबार में उपस्थित थे।
  • बताया गया कि पार्टी हाईकमान ने उन्हें दिल्ली तलब किया। इस बीच तीरथ सिंह रावत ने उसी रात राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। वह गृह मंत्री अमित शाह से भी मिले। इसके बाद शुक्रवार दो जुलाई को उत्तराखंड में उपचुनाव कराने को लेकर चुनाव आयोग को पत्र दिया। हालांकि चुनाव आयोग पहले ही कोविड काल में उपचुनाव कराने से मना कर चुका था। चुनाव आयोग को पत्र देने के बाद सूचना आई कि संवैधनिक संकट का हवाला देकर तीरथ ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस्तीफे की पेशकश की।
  • इसके बाद तीरथ सिंह रावत देहरादून पहुंचे और रात करीब नौ बजकर 50 मिनट पर उन्होंने सचिवालय में प्रेस कांफ्रेंस की और अपनी उपलब्धियां गिनाई। साथ ही सरकार के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। इसके बाद वह देर रात करीब 11 बजकर सात मिनट पर राजभवन पहुंचे और अपना इस्तीफा दिया। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के कारण संवैधानिक संकट खड़ा हुआ। इसलिए मैने इस्तीफा देना उचित समझा। उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व का धन्यवाद किया।

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