CBSE पैटर्न की नकल नहीं कर पाएगा RBSE:अब मार्किंग की नई व्यवस्था बनानी होगी

RBSE के दसवीं और बारहवीं क्लास के करीब 21 लाख स्टूडेंट्स को अभी रिजल्ट के लिए इंतजार करना होगा। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) रिजल्ट के लिए CBSE के फाॅर्मूले का इंतजार कर रहा था। बोर्ड की प्लानिंग थी कि CBSE का फाॅर्मूला कॉपी करके रिजल्ट जारी कर देंगे। लेकिन, RBSE का प्री-बोर्ड टेस्ट न कराने के आदेश ने तैयारियों पर पानी फेर दिया है।

इस कारण फार्मूला कॉपी नहीं होगा
CBSE ने दसवीं, ग्यारहवीं व बारहवीं तीनों कक्षाओं में इस साल की परीक्षा के अंकों को ज्यादा महत्व दिया है, वहीं पिछली दो कक्षाओं के मार्क्स को तीस-तीस प्रतिशत जोड़ने की सलाह दी है। खासकर दसवीं व बारहवीं के प्री बोर्ड एग्जाम को आधार बनाया जाएगा। लेकिन, राजस्थान में ऐसी कोई परीक्षा हुई ही नहीं। ऐसे में पिछले दो साल के परिणाम के आधार पर ही रिजल्ट देने की बाध्यता होगी। इस साल स्टूडेंट्स के सेशनल मार्क्स ही जोड़े जा सकते हैं।

ऐसे समझें दोनों बोर्ड में अंतर
CBSE में बारहवीं क्लास के स्टूडेंट को दसवीं, ग्यारहवीं में मिले कुल अंकों के तीस-तीस फीसदी और इस साल हुई प्री-बोर्ड परीक्षा के चालीस प्रतिशत अंकों को जोड़ा जाएगा। RBSE में बारहवीं के स्टूडेंट को दसवीं के तीस प्रतिशत अंक मिल जाएंगे, लेकिन 11वीं में भी स्टूडेंट को प्रमोट ही किया गया था। वहीं बारहवीं में भी प्री बोर्ड जैसी कोई परीक्षा नहीं हुई। ग्यारहवीं में हाफ इयरली एग्जाम को ही फाइनल एग्जाम मान लिया जाएगा। जबकि, बारहवीं में तो प्रैक्टिकल एग्जाम भी नहीं हुए। कोई टेस्ट तक नहीं लिया गया। प्री-बोर्ड भी नहीं हो सके। सीधे सीधे कहें तो बारहवीं क्लास का एक भी अंक स्कूल के पास नहीं हैं। सेशनल मार्क्स स्कूल जरूर दे सकता है।

अब बारहवीं का क्या विकल्प?
शिक्षा विभाग के पास अब यही विकल्प हे कि दसवीं के अंकों को अधिक महत्व देते हुए ग्यारहवीं के हाफ ईयरली के मार्क्स और बारहवीं के सेशनल मार्क्स को आधार बनाया जाये। फिलहाल, शिक्षा विभाग ने कोई निर्णय नहीं किया है कि वो कैसे बारहवीं के स्टूडेंट्स को मार्क्स देगा।

दसवीं में भी समस्या
शिक्षा विभाग के पास दसवीं क्लास के स्टूडेंट को पास करने के लिए आठवीं बोर्ड ही बडा आधार है। जिस स्टूडेंट को दसवीं में प्रमोट किया गया है, वो हकीकत में अंतिम परीक्षा आठवीं में ही दी थी। नौंवी में भी स्टूडेंट्स को प्रमोट ही किया गया था। तब भी हाफ इयरली एग्जाम ही हुए थे। ऐसे में दसवीं के स्टूडेंट को आठवीं के एग्जाम का ही विशेष महत्व देना होगा। दसवीं में रहते हुए इस स्टूडेंट ने तो कोई टेस्ट दिया ही नहीं।

इस अवधि में लगे स्कूल
राज्य में कोरोना काल में 9वीं से बारहवीं की क्लासेज 18 नवम्बर से 10 मार्च तक लगी थी। इस दौरान भी पचास प्रतिशत स्टूडेंट्स को ही परमिशन थी। इसके बाद 18 जनवरी से क्लास 6 से 8 के स्टूडेंट्स को भी स्कूल जाने की अनुमति दी गई। यहां भी 50 प्रतिशत स्टूडेंट्स को परमिशन थी। इस अवधि में भी एग्जाम नहीं लिए गए।

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