पायलट के साथ बाड़ेबंदी में रहे विधायक का यूटर्न:गहलोत मेरे नेता हैं और सचिन पायलट को भी यह बात माननी पड़ेगी

पिछले साल सचिन पायलट खेमे के साथ मानेसर बाड़ेबंदी में रहे सरदार शहर से कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा ने यूटर्न ले लिया है। शर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अशोक गहलोत को कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री बनाया है। पायलट को भी उन्हें नेता मानना ही पड़ेगा। गहलोत मेरे नेता हैं और हमेशा रहेंगे। पायलट भी मेरे नेता हैं, लेकिन गहलोत उनसे ऊपर हैं।

शर्मा ने कहा, ‘मेरे काम नहीं हो रहे थे इसलिए पिछले साल पायलट के साथ मानेसर गया था, लेकिन अब मुख्यमंत्री ने मेरी मांगें पूरी कर दी हैं। मेरे क्षेत्र की सभी मांगों को इस बजट में पूरा कर दिया गया है। प्रदेश प्रभारी अपनी भूमिका निभा रहे हैं। बयान देना और जमीन पर होना अलग बात है। समय आने पर सब होगा।

उन्होंने कहा, ‘मेरा आशीर्वाद पार्टी के साथ है। इस बुढ़ापे में ऐसा फैसला नहीं करूंगा जिसका पार्टी को नुकसान हो। 9 जगह है और मंत्री पद के दावेदार ज्यादा हैं, सबको मंत्री नहीं बनाया जा सकता।’

साथ बैठकर मामले में फैसला करना चाहिए
पायलट खेमे की मांगों पर बनी सुलह कमेटी का अब तक कुछ फैसला नहीं करने के सवाल पर शर्मा ने कहा, ‘मैं अपने 50 साल के अुनभव से बता रहा हूं कि किसी मामले को शांत करने के लिए कमेटी बना दी जाती है। कमेटियों का हश्र क्या होता है? यह सबको पता है। लंबे अरसे तक न्याय नहीं होता है तो मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। सुलह कमेटी के मेंबर का स्वर्गवास हो चुका है। अब इस कमेटी को मुख्यमंत्री और पायलट साहब को साथ बैठाकर मामले में फैसला करना चाहिए।’

पायलट भाजपा में नहीं जाएंगे, यह गतिरोध जल्द खत्म होगा
शर्मा ने कहा कि पायलट भाजपा में नहीं जाएंगे। पार्टी में जितना असंतोष है नहीं, उससे ज्यादा माहौल बनाया जा रहा है। पायलट ने खुद आज तक कुछ नहीं बोला है, उनके साथ के विधायक बोल रहे हैं। अब साथ वालों पर किसी का वश नहीं होता। यह गतिरोध जल्द खत्म हो जाएगा। फोन टैपिंग के आरोपों पर कहा कि किसी का फोन टैप नहीं हो रहा है, अगर किसी विधायक का हो रहा है, तो सामने आए।

‘मैंने भी सरकार गिराने की कोशिश की थी’
शर्मा ने कहा कि पार्टी में जो वरिष्ठ नेता हैं, उन्हें उनका हक मिलना चाहिए। मैंने भी कभी सरकार गिराने की कोशिश की थी, लेकिन गहलोत ने उस वक्त मेरा साथ नहीं दिया। वरना मैं भी CM होता। उस बात का मलाल आज भी है। शर्मा ने खुद मंत्री बनने से इंकार करते हुए कहा कि अब मुझे मंत्री बनने का कोई चाव नहीं है।

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