युवाओं में हल्के या मामूली कोविड-19 लक्षणों को जानलेवा बना देता है साइटोकाइन स्टॉर्म

पिछले कुछ दिनों से ऐसे केस सुनने में आ रहे हैं कि किसी को कोविड हुआ तो लक्षण बेहद मामूली थे। अचानक हालात बिगड़े और वह व्यक्ति गंभीर लक्षणों से जूझने लगा। कई मामलों में तो जान ही चली गई। दुनियाभर के डॉक्टरों के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है कि माइल्ड या मॉडरेट कोविड-19 कुछ लोगों के लिए अचानक गंभीर या जानलेवा कैसे बन जाता है।

यह माना जा सकता है कि उम्र और कोमॉर्बिडिटी की वजह से ऐसा हुआ होगा। पर डॉक्टरों के पास कई केस हैं जहां मरीजों की प्रोफाइल में ऐसा कुछ नहीं था। यानी माइल्ड और मॉडरेट लक्षणों वाले युवाओं में भी अचानक कोविड इन्फेक्शन बिगड़ा और उनकी मौत हो गई।

कुछ स्टडी में इसके लिए साइटोकाइन स्टॉर्म को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। यह न केवल युवाओं में लक्षणों को गंभीर बना रहा है, बल्कि जानलेवा भी साबित हो रहा है। इस साइटोकाइन स्टॉर्म को समझने के लिए हमने मुंबई के जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के डॉ. राहुल बाहोत और नई दिल्ली के मणिपाल हॉस्पिटल्स के डॉ. नवीन कुमार से बात की। दोनों ही डॉक्टर कोविड-19 मरीजों के इलाज में सक्रियता से सेवाएं दे रहे हैं। आइए समझते हैं इस साइटोकाइन स्टॉर्म को…

साइटोकाइन स्टॉर्म क्या होता है?

  • साइटोकाइन स्टॉर्म के बारे में जानने से पहले आपको साइटोकाइन को समझना होगा। यह एक प्रोटीन (ग्लायकोप्रोटीन) है, जिसे हमारे शरीर के सेल्स यानी कोशिकाएं बनाती हैं। जब कोई इन्फेक्शन होता है तो उसे ठीक करने के लिए शरीर में जो इम्यून रिस्पॉन्स डेवलप होता है, उसमें यह प्रोटीन भी शामिल है।
  • साइटोकाइन का बनना अच्छा है। यह वायरस से लड़ने वाले शरीर के सैनिकों की तरह है। पर अगर किसी पैथोजन (वायरस) के शरीर में आने पर यह रेस्पांस हाइपर हो जाता है यानी अधिक मात्रा में साइटोकाइन बनने लगते हैं तो यह घातक हो सकता है। इसे ही साइटोकाइन स्टॉर्म कहते हैं।

यह युवाओं को कैसे प्रभावित कर रहा है?

  • युवाओं में अधिक गंभीर लक्षण आने की एक बड़ी वजह मेडिकल एडवाइज लेने और अस्पताल जाने में देरी भी है। पिछले कुछ समय में अस्पतालों में बेड हासिल करना भी एक बड़ी मशक्कत रही है। इस वजह से डॉक्टरी सलाह लेने में देर होना नॉर्मल हो गया है। इससे अस्पताल जाने तक लक्षण गंभीर हो चुके होते हैं।
  • ऐसा सबसे ज्यादा 18 से 28 साल की उम्र के युवाओं के साथ हो रहा है। उन्हें कोई दूसरी समस्या रहती नहीं है। और तो और, लक्षण भी माइल्ड होते हैं। पर इस बार साइटोकाइन स्टॉर्म की वजह से इन्फेक्शन होने के पांच-छह दिन बाद गंभीर लक्षण सामने आ जाते हैं। इसी वजह से भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर में इन्फेक्ट होने वाले युवाओं की संख्या बढ़ी है। सैकड़ों लोगों को निमोनिया हुआ है और रिकवर होने के बाद भी महीनों तक कमजोरी का सामना कर रहे हैं।

कोविड-19 के मामले में साइटोकाइन स्टॉर्म क्यों नुकसान पहुंचा रहा है?

  • अमेरिका में हुई स्टडीज में सामने आया है कि हमारे इम्यून सिस्टम में वायरस के इन्फेक्शन को रोकने के लिए सेल्स (कोशिका) खुद को खत्म कर लेते हैं। पर जब कई सारे सेल्स ऐसा करते हैं तो टिश्यू या उस पूरे अंग को नुकसान हो सकता है। साइटोकाइन स्टॉर्म में भी ऐसा ही कुछ हो रहा है।
  • कोविड-19 वायरस के खिलाफ जब फेफड़ों में यह रिस्पॉन्स होता है तो टिश्यू ही खत्म हो जाते हैं। इससे निमोनिया होता है और खून में ऑक्सीजन कम होने लगता है। ऑक्सीजन शरीर के हर हिस्से तक नहीं पहुंच पाती। धमनियों में सूजन होती है। जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। थ्रोम्बोसिस या खून के थक्के जमने का खतरा भी बढ़ जाता है। यह भी जानलेवा ही साबित हो रहा है। साइटोकाइन स्टॉर्म शरीर के अन्य प्रमुख अंगों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। फेफड़ों के बाद हार्ट, किडनी और लिवर इससे प्रभावित हो रहे हैं।

साइटोकाइन स्टॉर्म से कैसे बचा जा सकता है?

  • युवाओं में शुरुआती गंभीर लक्षण सांस लेने में दिक्कत का है। यहीं से समस्या शुरू होती है। इसी वजह से डॉक्टर ऑक्सीजन का स्तर जांचने की सलाह देते हैं। अगर ऑक्सीजन सेचुरेशन 94% से नीचे गया तो तत्काल अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है।
  • डॉक्टर टोसिलिजुमाब जैसी कुछ दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि इम्यून सिस्टम को शरीर पर हमला करने से रोका जाए। यह कोविड-19 मरीजों के लिए लाइफसेविंग साबित हो रही है। पर ज्यादातर दवाएं प्रायोगिक हैं। इनके इस्तेमाल का साइंटिफिक आधार कम ही है।
  • अमेरिका के टेम्पल हेल्थ यूनिवर्सिटी सिस्टम में हुई स्टडी से पता चला कि साइटोकाइन स्टॉर्म के समय मरीज में कुछ एंजाइम का स्तर बढ़ा हुआ होता है। यह टिश्यू को हुए नुकसान का संकेत है। कई लोगों ने साइटोकाइन स्टॉर्म के बाद भी रिकवर किया है, पर इस मामले में रिकवरी धीमी है। जान बचाने के लिए इलाज जल्दी शुरू करना जरूरी है।

sources: https://www.bhaskar.com/db-original/explainer/news/coronavirus-cytokine-storm-symptoms-kya-hai-128518516.html

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