NBFC और बैंक के रिकवरी एजेंट्स क्यों अपनी मानवता खो चुके है?

आज हमारा देश फिर से लॉकडाउन की तरफ जा रहा है. अलग अलग राज्य अपनी कोरोना की परिस्थिति को देखते हुए लॉकडाउन लगाये जा रहे है. लॉक डाउन लगाना जरुरी भी हो रखा है क्युकी कोरोना जिस तरह से फेल रहा है,उसे बिना लॉकडाउन रोकना संभव नही हो रहा है.जब तक संक्रमित लोग दुसरे लोगो के सम्पर्क में आयेगे ये फेलता ही जायेगा.इसी कारण अलग अलग राज्यों में लॉकडाउन की स्थिति पैदा होती आ रही है. सरकार अपनी तरफ से हर संभव ठोस कदम उठा रही है ताकि आम लोगो की जिन्दगी बच सके.

अब हम लॉकडाउन का दूसरा पहलु और दिखाते है जहाँ कई बैंक और NBFC कंपनियों ने लोन रिकवरी के लिए अपनी मानवता खो दी. इन बैंक और NBFC कंपनियों के रिकवरी एजेंट कर्मचारी नहीं होते है ये लोग गली के वो गुंडे होते है जो एक रूपये के कमीशन के चक्कर में भी लोगो की जिन्दगी इस तरीके से हराम कर देते है कि वो ग्राहक आत्महत्या तक करने को तैयार हो जाते है.

अब तक केवल यह सामने आया था कि NBFC कंपनी ही लोन वसूली के लिए ऐसे गुंडे रखती है जो अपने कमीशन के लिए लोगो को आत्महत्या के उकसाना ,उनके रिश्तेदारों को कॉल करके धमकाना,मोबाइल की कांटेक्ट लिस्ट में से नंबर चुरा कर सबके सामने ग्राहकों को जलील करना ये सब करती है. इन सब ओछी हरकतों के कारण पिछले लॉकडाउन में भी कई लोगो ने आत्महत्या तक की है.

अब इसी तरह का कार्य बैंक के रिकवरी एजेंट्स के द्वारा करना शुरू हो चूका है. जिसमे इनके रिकवरी एजेंट्स अपने ग्राहकों को “डिफाल्टर, चोर,बैंक का पैसा तेरा बाप भरेगा क्या ,इस तरह के शब्दों के इस्तेमाल के साथ “अब देख तू तेरे घर बार बार रिकवरी एजेंट को भेजता हूँ” इस तरह की मानशिक प्रताड़ना देना बैंक के रिकवरी एजेंट्स के लिए आम बात हो गयी है.लोगो के जीने या मरने से इन्हें कोई मतलब नही होता है,इन्हें बस अपने कमीशन के लिए रिकवरी करनी होती है.

हमारे देश में जिस तरह से लोन रिकवरी को लेकर गाइड-लाइन बनाई गयी है अगर उसका थोडा भी ख्याल रखा जाये तो इस तरह की रिकवरी से कुछ हद तक राहत मिल सकती है. लेकिन समस्या यह नही है की इनकी पालना हो ,समस्या ये है की आर.बी.आई. इस तरह की मुसीबत क्यों मोल ले .

जब तक आर.बी.आई. खुद आगे आकर इन बैंक और NBFC पर नकेल नहीं कसता है तब तक हर बार ये एक मुद्दा बनता जायेगा.और हर कोई न कोई ग्राहक आत्महत्या करता रहेगा या कोई न कोई उत्पीडित होते रहेगा. न इस मामले में मानवाधिकार आयोग कोई सज्ञान लेता है ,न कोई न्यायलय ,न सरकारी संस्थाएं .हर किसी को बस खुद का ही काम करने से मतलब होता है.केवल एक छोटा सा काम और लोगो राहत मिल सकती है लेकिन कोई इस मामले में अपनी टांग नही अडाना चाहता.

माननीय मोदी जी ने कहा था कि आत्मनिर्भर बनो तो हमारे ख्याल से आत्मनिर्भर बनने का समय आ गया है. जिस तरह का रिकवरी एजेंट उसी तरह की उसकी खातिरदारी करनी चाहिए क्युकी हमे आत्मनिर्भर बनना है.

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