दिल्‍ली हिंसा: दिशा-निकिता-शांतनु थे मोहरे, खालिस्तानी आतंकियों के हाथों में थी कमान

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की साइबर सेल ने टूलकिट (Tool Kit) की तफ्तीश के दौरान कई अहम जानकारियां मिली हैं. पुलिस के सामने पूरी साजिश लगभग साफ हो चुकी है. 

कनाडा में बैठे खालिस्तानियों ने रची साजिश

पुलिस को जांच में पता चला कि टूलकिट (Tool Kit) की क्रिएटर दिशा रवि, निकिता और शांतनु थे, जिसे बनवाने में कनाडा में बैठे खालिस्तानी समर्थको का बड़ा हाथ है. मीडिया के सामने दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया कि 27 नवंबर 2020 से किसान आंदोलन चल रहा है. दिल्ली के तमाम बॉर्डर पर किसान बैठे हैं. इसी बीच 26 जनवरी को दिल्ली के तमाम बॉर्डर, लालकिले और सेंट्रल दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंसा (Farmer Violence) हुई थी. जिसके बाद दिल्ली पुलिस को सोशल मीडिया की निगरानी में इस टूलकिट के बारे में पता चला. फिर 4 फरवरी को एक एफआईआर दर्ज की गई. 

टूलकिट के हिसाब से दिल्ली में की गई हिंसा

जांच के दौरान पता चला कि इस टूलकिट (Tool Kit) में प्रायर एक्शन के नाम से कुछ पॉइंट लिखे थे, जैसे 26 जनवरी और उससे पहले हैशटैग की डिजिटल स्ट्राइक करना, 23 जनवरी से ट्वीट स्टॉर्म करना, 26 जनवरी को फिजिकल एक्शन करना. इसी टूलकिट के दूसरे भाग में भारत की सांस्कृतिक धरोहर जैसे ‘योग’ और ‘चाय’ को हानि पहुंचाने और भारतीय दूतावास को टारगेट करने के निर्देश लिखे थे. इस टूलकिट में लिखे एक्शन प्लान को जब वास्तविक घटनाक्रम से मिलाया गया तो पता चला कि बिल्कुल वैसे ही हुआ है, जैसा लिखा था. 

निकिता के फोन, लैपटॉप जब्त किए गए

मामले को गंभीरता से लेते हुए टूलकिट की जांच की गई. जिसमें ऑनलाइन मौजूद स्क्रीन शॉट्स की भी पड़ताल हुई. जांच में पर्याप्त सबूत मिलते ही इस टूल किट की एडिटर निकिता जैकब (Nikita Jacob) के खिलाफ कोर्ट से सर्च वारंट जारी करवा कर केस के जांच अधिकारी को मुंबई भेजा गया. इसके बाद 9 फरवरी को निकिता के खिलाफ मुंबई से सर्च वारंट जारी हुआ. कोर्ट के आदेश के बाद 11 फरवरी को निकिता के मुम्बई आवास पर सर्च किया गया. जिसमें उसके 2 लैपटॉप, एक आई फोन और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए. 

खालिस्तानी मो धालीवाल ने बनाया था प्लान

जांच में ये भी पता चला कि खालिस्तानी समर्थक मो धालीवाल (Mo Dhaliwal) ने अपनी एक करीबी और कनाडा निवासी पुनीत नाम की महिला के जरिए निकिता जैकब (Nikita Jacob) से संपर्क किया था. मकसद था कि 26 जनवरी को ग्लोबल डे एक्शन करना, उससे पहले और बाद में ट्वीट स्टॉर्म और डिजिटल स्ट्राइक करना. इसके लिए  askwhyindia और Poetic Justice Foundation ने 11 जनवरी को ZOOM पर एक मीटिंग का आयोजन किया, जिसमें निकिता, शांतनु, मो धालीवाल समेत करीब 60-70 लोग शामिल हुए. मीटिंग में ये तय हुआ कि इस कैंपेन को विश्व स्तर पर फैलाया जाए. 

किसानों को भड़काना चाहता था मो धालीवाल

जांच में पता लगा है कि मो धालीवाल (Mo Dhaliwal) का मकसद किसानों को गलत जानकारी देकर उनके बीच असंतोष भड़काया जाए. यहां तक कि किसान की एक्सीडेंट में हुई मौत को भी गोली से हुई मौत बताया जाए. सर्च में पाया गया कि निकिता, शांतनु और दिशा ने टूल किट बनाया था. शांतनु ने इसके लिए ईमेल अकाउंट scrapfarmersact@gmail.com बनाया, जो टूलकिट का ओनर है. टूलकिट एक ऐसा डॉक्यूमेंट था, जो कुछ लोगों के बीच शेयर होना था लेकिन ग्रेटा ने गलती से ये ट्वीट कर दिया. 

हिंसा के लिए 6 दिसंबर को बना वॉट्सएप ग्रुप

जांच में पता चला कि 6 दिसंबर 2020 को तैयार किए गए एक व्हाट्सएप ग्रुप से ये सभी आपस में जुड़े हुए थे. दिशा रवि (Disha Ravi) के मोबाइल डेटा से पता चला कि उसने निकिता (Nikita Jacob) और शांतनु के साथ मिलकर टूलकिट को बनाया और उसे सर्कुलेट किया. दिशा जो फ्राइडे फॉर फ्यूचर फाउंडेशन से जुड़ी है, उसने ही ये टूलकिट टेलीग्राम पर ग्रेटा को दी थी. फोन से दिशा ने काफी डेटा डिलीट कर दिया है. उसके फोन में टूलकिट (Tool Kit) के बारे में 3 फरवरी को जो डिटेल्स थी, वह भी डिलीट कर दी. इस टूलकिट को खालिस्तानी संगठनों की मदद से बनाया गया था. 

महाराष्ट्र का रहने वाला है शांतनु

शांतनु महाराष्ट्र के बीड का रहने वाला है. वह एक NGO XR से जुड़ा है. उसी एनजीओ से निकिता जैकब भी जुड़ी हुई है. शांतनु पेशे से इंजीनियर है. सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस खालिस्तानी समर्थक मो धालीवाल पर नकेल कसने की तैयारी में है. दिल्ली पुलिस की कोशिश है कि उसे हिंदुस्तान लाकर जांच में शामिल करवाया जाए. इसी बीच जांच में नया नाम पीटर फेड्रिक का आया है. वह भी खालिस्तान समर्थक है. इसको भी तमाम ट्वीट टैग किए गए थे.

पीटर फेड्रिक और भजन भिंडर की भी तलाश

वह भजन सिंह भिंडर नाम के खालिस्तानी के संपर्क में था. भजन सिंह भिंडर और पीटर फेड्रिक K2 से तालुख रखते हैं. पीटर फेडरिक ने ये प्लान किया कि किसे हैशटैग करना है, किसे फॉलो करना है, कब क्या ट्वीट कराना है. पीटर फेड्रिक का नाम फॉलो करने वालों की उन लोगों की लिस्ट में क्यों डाला गया,  इसकी जांच चल रही है. पुलिस के मुताबिक, पीटर फेड्रिक मलेशिया में रह रहा है और फांसीवाद पर शोध कर रहा है. अमेरिका में महात्मा गांधी की जिन प्रदर्शनकरियो ने मूर्ति तोड़ी थी उसमें पीटर भी शामिल था.

निकिता और शांतनु को ढूंढ रही है दिल्ली पुलिस

पुलिस के मुताबिक, जिस ZOOM मीटिंग में निकिता जैकब (Nikita Jacob) शामिल थी, उसमें 60 से 70 लोग थे. ये पता लगाया जा रहा है कि इस ZOOM मीटिंग में पीटर था या नहीं. इसके साथ ही दिल्ली पुलिस ने गूगल से जो जानकारी मांगी थी, उसका जवाब आ गया है. अब दिल्ली पुलिस फरार चल रहे निकिता जैकब और शांतनु के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करवाकर उनकी तलाश में जुट गई है. जिससे 26 जनवरी को हुई हिंसा और किसान आंदोलन की आड़ में देश के खिलाफ रची गई साजिश का पता लगाया जा सके.

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