धार्मिक स्थल रजिस्ट्रेशन रेगुलेशन अध्यादेश-2020 पर अखाड़ा परिषद का यू-टर्न, CM योगी के फैसले का किया समर्थन

प्रयागराज: साधु संतों की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने धार्मिक स्थल रजिस्ट्रेशन रेगुलेशन अध्यादेश-2020 पर यू-टर्न लिया है. साधु-संतों ने अध्यादेश पर सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ के फैसले का समर्थन करने का ऐलान किया है. इससे पहले अखाड़े का कहना था कि अध्यादेश पर साधु-संतो से राय नहीं ली गई. सीएम योगी की तारीफ करते हुए कहा गया कि कोरोना काल में भी सीएम योगी दिव्यता और भव्यता के साथ माघ मेले का आयोजन कर रहे हैं.

सीएम योगी खुद संत, अध्यादेश को लेकर फैसला मान्य 

ये फैसला प्रयागराज के श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी में हुई अहम बैठक में लिया गया. इस बैठक में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि सीएम योगी खुद एक संत हैं, अध्यादेश को लेकर सीएम जो भी फैसला लेंगे वो मान्य होगा. सीएम योगी के फैसले का सभी साधु संत सम्मान करेंगे. ये प्रस्ताव सभी तेरह अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने प्रस्ताव पास कर किया.

उत्तराखंड के सीएम से की मांग

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से अखाडा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने मांग करते हुए कहा कि जैसी तैयारी प्रयागराज माघ मेले को लेकर हो रही है वैसी ही तैयारी हरिद्वार महाकुंभ की भी की जाए. हरिद्वार में एक फरवरी से वैष्णव संप्रदाय के तीनों अनी अखाड़ों समेत सभी अखाड़ों को जमीन का किया जाए आवंटन किया जाए.

महाराष्ट्र में संतों की हत्याओं पर रोष

इस बैठक में महाराष्ट्र में संतों की हो रही हत्याओं पर भी गहरा रोष व्यक्त किया गया. इसके साथ ही साधु-संतों ने राष्ट्रपति से महाराष्ट्र सरकार बर्खास्त कर दोबारा चुनाव कराने की मांग भी की. महंत नरेंद्र गिरी ने कहा है कि महाराष्ट्र सरकार साधु संतों की सुरक्षा करने में पूरी तरह से नाकाम है.

इससे पहले अखाड़ा परिषद ने कहा था ये—

अध्यादेश लाने से पहले लें साधु-संतों से राय
इससे पहले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी (Mahant Narendra Giri) ने कहा कि यूपी में सभी मठ और मंदिर सुरक्षित हैं, उन्हें किसी तरह का कोई खतरा नहीं. उन्होंने कहा था कि अगर धार्मिक स्थलों के लिए कोई अध्यादेश लाना बेहद जरूरी है और इसके लिए कोई निदेशालय गठन करना जरूरी है तो इसके पहले संतों की भी राय ली जानी चाहिए.

साधु-संतों को राज्य सरकार और अधिकारियों के अधीन करना उचित नहीं
महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि किसी भी तरीके से साधु-संतों को राज्य सरकार और अधिकारियों के अधीन करना उचित नहीं होगा. नरेंद्र गिरी ने कहा कि यूपी में पहले ही से धार्मिक स्थलों को लेकर जो व्यवस्था चली आ रही है वो ठीक है. साथ ही महंत नरेंद्र गिरी ने ये भी कहा है कि सूबे के मुखिया सीएम योगी आदित्यनाथ खुद भी एक संत है और गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर भी हैं इसलिए वे जो भी कदम उठाएंगे सोच-समझकर ही उठाएंगे.

सरकार किसी तरह से अधिग्रहण न करें
मठों और मंदिरों का भी सरकार किसी तरह से अधिग्रहण भी न करे. उन्होंने कहा है कि कानून व्यवस्था को लेकर अगर कोई नियम कानून सरकार बनाती है तो उसका मठ और मंदिर पालन करने के लिए जरूर बाध्य होंगे और उसका पालन भी करेंगे.

अध्यादेश लाने की तैयारी में सरकार
उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों के रजिस्ट्रेशन और संचालन के लिए योगी सरकार जल्द अध्यादेश लाएगी. इसके लिए दूसरे राज्यों के कानूनों और प्रस्तावों का अध्ययन किया जा रहा है.  बता दें कि इससे पहले कैबिनेट बैठक में सीएम योगी की अध्यक्षता में धार्मिक कार्यों के संचालन लिए निदेशालय गठन के प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है. अब धार्मिक स्थलों के रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन के लिए सरकार अध्यादेश लाने की तैयारी में है. यूपी सरकार मंदिरों, मस्जिदों और दूसरे धार्मिक स्थलों के संचालन के लिए नियम-कायदे तय करने की कवायद कर रही है. उसी सिलसिले में गाइडलाइंस बनाने का काम चल रहा है.

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष पद
साधु-संतों की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद साल 1954 में स्थापना हुई थी. जिसमें कुल 13 अखाड़े शामिल हुए. इसके बाद से इसी परिषद द्वारा सभी अखाड़ों के कुंभ और अर्धकुंभ में स्नान का वक्त और उनकी जिम्मेदारी तय की जाती है जिसे सभी को मानना पड़ता है.  

अखाड़े की स्थापना के समय तय किया गया था कि हर अर्धकुंभ से पहले अखाड़े के अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा. परंपरा 2004 तक चलती रही. 2004 में चुनाव हुए और महंत ज्ञान दास को अध्यक्ष चुना गया. वो अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी के महंत हैं. 2014 में महंत ज्ञान दास की जगह पर नरेंद्र गिरी को अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष चुना गया. सिंहस्थ कुंभ 2016 में भी अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के तौर पर महंत नरेंद्र गिरी को ही मंजूरी मिली.

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