सुप्रीम कोर्ट ने सभी धर्मों में तलाक के लिए एक समान कानून पर जताई सहमति, केंद्र को भेजा नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने आज सभी धर्मों के लिए तलाक और गुजारा भत्ते को एक समान आधार पर लागू करने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने के बाद केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों ने हर धर्म के लोगों के लिए एक समान कानून हो। जिससे तलाक और गुजारा भत्ता तय किया जाए? 

बता दें कि वर्तमान में अलग-अलग पसर्नल ला है। जो उनके धर्म के रीति रिवाज के आधार पर लागू होते हैं।

इस जनहित याचिका को भारतीय जनता पार्टी के नेता और वरिष्ठ वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की थी। 

 जनहित याचिका में देश भर में सभी लोगों के लिए “तलाक के लिए एक समान आधार” वाले कानून की मांग गई है। चाहे वह किसी भी धर्म का हो। जनहित याचिका में केंद्र सरकार से व्यक्तिगत कानूनों में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने के लिए धर्म, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर बिना किसी भेदभाव के तलाक के सभी मामलों में लागू होने वाले समान कोड को लाने के लिए कहा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गृह मंत्रालय के साथ-साथ कानून मंत्रालय से नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि हम सावधानी के साथ नोटिस जारी कर रहे हैं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबड़े की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से पहले पूछती है कि क्या याचिकाकर्ता “सुप्रीम कोर्ट से व्यक्तिगत कानूनों का अतिक्रमण करने और उनके द्वारा बनाए गए भेद को दूर करने के लिए कह रहे हैं?”

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि याचिका में केवल 14, 19 और 21 अनुच्छेदों का उल्लंघन करने वाले निजी कानूनों को हटाने की मांग की गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *